गन्ना उत्पादन: उत्तरप्रदेश सरकार लेगी इज़राइल से मदद

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लखनऊ,27 जुलाई: भारत व इज़राइल के सम्बन्ध सदियों पुराने हैं। दोनों देश एक दूसरे देश के साथ सामरिक सहयोग और कृषि तकनीक साझा कर रिश्तों की दीवार को मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे है। इसी क्रम में इज़राइल के राजदूत रोन मलका ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तरप्रदेश इज़राइल के साथ अपने संबध और मजबूत बनाने की ओर आगे बढ़ रहा है। इसी के तहत प्रदेश की कृषि, जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, जल पुनर्चक्रण, सिंचाई, खाद्य प्रसंस्करण और कम पानी में अधिक गन्ना उत्पादन करने जैसे क्षेत्रों में इज़राइली तकनीक के इस्तेमाल से काफी लाभ उठाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे के कई गन्ना उत्पादक जिलों में जल स्तर काफी नीचे चला गया है। इससे गन्ना की खेती का रकबा कम होने के साथ साथ उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। गन्ना किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा दिलाने के लिए कम पानी में अधिक उत्पादन लेने की तकनीक में इज़राइल का सहयोग अपेक्षित है। इस संर्दभ में राजदूत रोन मलका से बातचीत हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में प्रदेश के विशेषज्ञ इजराइल जाएंगे और वहां से तकनीक देखकर अपने प्रदेश में अपनाएंगेँ। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गन्ना उत्पादक सूखे जिलों का चयन किया जाएगा। बाद में सभी जिलों में इसे आगे बढाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की खेती के लिए जल संरक्षण तकनीक को जनसहभागिता के तौर पर गन्ना किसानों तक पहुचाने की आज जरूरत है।

कम पानी में गन्ना की खेती को प्रौत्साहन देने के मसले पर बात करते हुए इज़राइली राजदूत ने कहा कि भारत इज़राइल का सामरिक भागीदार देश है। यहां के गन्ना किसानों को जल संरक्षण तकनीक देकर सीमित पानी मे ज्यादा उत्पादन दिलाने के लिए जल संरक्षण विधियों और तकनीकी प्रविधियों से किसानो को जोडे जाने की जरूरत है। इज़राइल के राजदूत ने जल संरक्षण के लिए भूगर्भ जल के पुर्नसंरक्षण को गन्ना किसानों के लिए व्यवहारिक जरूरत बताते हुए इसे अपना कर गन्ना की खेती करने की वकालत की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पानी की एक एक बूंद का सदुपयोग और अनावश्यक पानी की बर्बादी रुके इसके लिए टपक सिंचाई जैसी पद्धतियां अपनाने के साथ इज़राइली विशेषज्ञों द्वारा दी गयी नवीन विधियों को अपनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना प्रभावित इलाके हो या अन्य जिले जहां जहां पानी की उपलब्धता घट रही है, वहां का सर्वे कर डिटेल रिपोर्ट बनायी जाएगी और उसके बाद उस पर कार्य योजना का खाका तैयार करने में इज़राइल के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में पानी की समस्या विकराल रूप ले इससे पहले ही हमें खेती में पानी की बर्बादी को रोककर कम पानी में अधिक उत्पादन लेने की तकीनीकों पर काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इज़राइल से पानी बचाने की तकनीकें सीखकर हम बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित इलाकों में भी गन्ने की खेती करने के नावचारों पर विचार कर रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब इज़राइल अपने यहां उपलब्ध जल का 94 प्रतिशत रीसाइकिलिंग कर इस्तेमाल में ला सकता है तो भारत क्यों नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना और धान की खेती में पानी बहुत लगता है इसके समाधान के लिए नवम्बर, 2019 में इज़राइल में जल संरक्षण पर आयोजित होने वाले सम्मेलन में वो भाग लेने के लिए इज़राइल जाने पर विचार कर रहे है।

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