उत्तर प्रदेश: चीनी मिलों ने की गन्ना समर्थन मूल्य न बढ़ाने की गुहार

लखनऊ: बकाया भुगतान में विफल उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों के सामने अब रिकवरी में गिरावट की समस्या बनी हुई है। कोरोना काल में चीनी की कम खपत और ठप निर्यात से चीनी मिलों का प्रबंधन पहले से ही काफी परेशान हैं। अब चीनी रिकवरी में गिरावट समस्या उभरकर सामने आई है। जिसके चलते मिलों ने राज्य सरकार से समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी न बढ़ाने की गुहार लगाने के साथ ही वित्तीय सहायता की भी मांग की है।

जागरण डॉट कॉम में प्रकाशित खबर के मुताबिक, उत्तर प्रदेश चीनी मिल्स एसोसियेशन के सचिव दीपक गुप्तारा का कहना है कि कोरोना संक्रमण के चलते चीनी की खपत में रिकार्ड गिरावट आयी है और निर्यात संकट भी गहराया है। चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रुपये क्विंटल निर्धारित है जिसमें लागत मूल्य भी नहीं निकल पा रहा है। साथ ही मिलों को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए सहायता की जानी चाहिए।

5 COMMENTS

  1. गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य कितने प्रतिशत है । चीनी के मूल्य से बताओं ।

  2. sala ghata kissan jhele aur fayda hota hai to kya kissano ko kuch dete hai mil wale ye sab noutanki hai corona ke karan aur fayda hua hai milo ke karodo ka sanetizer bech chuke hai aur ghata dikha rahe hai 2015 se rs nhi bade hai ganna ke

  3. किसान का घाटा, क्या घाटा नही होता, आज किसान किस तरह से अपनी जीविका चला रहा है उसकी चिंता किसी भी सरकार को नही है, तेल महँगा, खाद महंगा, बीज महंगा, लेवर रेट भी बहुत अधिक। और ऊपर से मिल मालिक रेट ना बढ़ाने का दबाव बना रहे है। जबकि पिछले 2 साल से कोई रेट में इजाफा नही किया गया है।

  4. चीनी मिले किसान से जो गन्ना लेती हैं उससे वोकितने और उत्पाद बनाती है उससे उनको बहुत फायदा होता है । ये वेबसाइट केवल मिलों का रोना रोने के लिए ही बनी है इन्हें किसानों के बारे में ये कभी नही बताती है

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