विवेक एम पिट्टे बने ISMA के नए अध्यक्ष, रोहित पवार का हुआ कार्यकाल पूरा

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नई दिल्ली, 6 दिसम्बर, देश में चीनी उद्यमियों के सबसे बड़े संगठन ‘इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन’ यानि इस्मा की 85 वीं वार्षिक आम सभा की बैठक राजधानी दिल्ली स्थित होटल ताज मानसिंह में सम्पन्न हुई। बैठक में देशभर से आए चीनी मिल संघ के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक की अध्यक्षता इस्मा के वर्तमान अध्यक्ष रोहित पवार ने की। रोहित पवार का एक साल का कार्यकाल पूरा हो गया इसलिए नए अध्यक्ष के तौर उपाध्यक्ष विवेक एम पिट्टे को नया अध्यक्ष बनाया गया है। वार्षिक आम सभा की इस बैठक में देशभर से आए तक़रीबन 150 से भी अधिक हिताधारकों ने भाग लिया। रोहित पवार ने कहा की, मेरे कार्यकाल में मैंने चीनी उद्योग को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक निर्णय लिए है। मुझे खुशी है कि मैं अपने कार्यकाल के दौरान उद्योग के कई पहलुओं को जान सका। एसोसिएशन की नियम पुस्तिका के अनुसार, अध्यक्ष पद का प्रभार विवेक पिट्टे को सौंपा गया है।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हु्ए इस्मा के नए अध्यक्ष विवेक पिट्टे ने कहा कि मैं बिहार से आता हूँ। चीनी उद्योग में आने वाली चुनौतियों से मैं अच्छी तरह वाक़िफ़ हूँ। इस्मा की टीम का मैं आभारी हूँ कि मुझे अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी सौंपी है, जिसे मैं अच्छी तरह से निभाउंगा। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गन्ना किसान और चीनी उद्योग दोनों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने पर हमारा ध्यान है। गन्ना किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन दिलाने की आज ज़रूरत है वहीं चीनी मिलों की आर्थिक आजीविका बढ़ाने के लिए अतिरिक्त आय श्रोतों पर काम काम करने की ज़रूरत है।

पिट्टे ने कहा कि इसबार देश में चीनी का अक्टूबर- नवम्बर में उत्पादन 18.85 लाख टन रहने की खबर चिन्ताजनक है लेकिन हमारे पास ओपनिंग स्टॉक चीनी का अभी भी इतना ज़्यादा है कि चीनी का सरप्लस ही रहेगा।

पिट्टे ने इस्मा के अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार मीडिया से खुलकर बात की और कहा कि हमने एजीएम की बैठक में चीनी क्षेत्र के संकट को लेकर चर्चा की है साथ ही इस पर सरकार ने क्या कदम उठाये हैं उन पर भी मंथन हुआ है। आने वाले दिनों में चीनी उद्योग अपने बलबूते पर खड़ी रहे इसके लिये क्या कुछ किया जाना है इन सभी मसलों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई है।

चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाया के मसले पर बोलते हुए पिट्टे ने कहा कि 30 नवम्बर 2019 तक विपणन वर्ष 2018-19 के लिए चीनी मिलों पर गन्ने का बकाया तक़रीबन 5 हज़ार करोड़ रूपये आंका गया है। पिट्टे ने कहा कि इस बार महाराष्ट्र में देर से गन्ना पैराई शुरु हुंई है तो गन्ना सत्र कम दिन ही चलेगा। वहीं कर्नाटक में सूखे की वजह से गन्ना उत्पादन में गिरावट की आशंका है।

पिट्टे ने कहा कि इसबार चीनी मिलों का परिचालन कम हुआ है। बीते साल 30 नवम्बर तक 418 चीनी मिलों में गन्ना पैराई का काम हो रहा था लेकिन इसबार इस समान अवधि के दौरान 30 मात्र 279 चीनी मिलों में ही पैराई सत्र शुरु हुआ है। हालाँकि चीनी का उत्पादन गिरने से हमारे लिए घबराने जैसी कोई बात नहीं है।

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