निर्यात के लिए चीनी देने से बैंकों द्वारा इन्कार; मिलें चाहती है ‘आरबीआई’  हस्तक्षेप करें…

689
पुणे: चीनी मंडी 
अधिशेष की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात के लिए पैकेज की घोषणा की है, फिर भी राज्य के बैंकों ने अपने कब्जे की चीनी निर्यात के लिए  देने से साफ़ इन्कार कर दिया है। बैंकों की इस  भूमिका बदलने के लिए ‘आरबीआई’ ने हस्तक्षेप करने के मांग चीनी उद्योग कर रहा है।
हो सकती है अधिशेष चीनी की समस्या…
दो साल पहले मौसम की करीबन 15 लाख मेट्रिक टन चीनी शेष थी,  पिछले सीजन में फिर से 107 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ । अनुमान है कि,  कुल 122 टन में से 80 लाख टन चीनी बेची गई है। जबकि इस मौसम में गन्ना का मौसम शुरू हो गया है, लेकिन अभी भी विभिन्न जिलों में 42 लाख टन चीनी शेष है । इस मौसम में अगर कुल चीनी उत्पादन 90 लाख टन होता है तो लगभग 130 लाख टन चीनी उपलब्ध होगी। चीनी उद्योग ने कहा है कि,  अधिशेष चीनी से कीमतों पर  प्रतिकूल प्रभाव के कारण मिलों को और घाटा हो सकता है ।
बैंक कोई भी रिस्क लेने को तैयार नही…
वेस्ट इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.बी. ठोम्ब्रे ने कहा कि,  कच्चे चीनी के निर्यात के लिए, निर्यातकों को चीनी को 1900 से 1950 रुपये प्रति क्विंटल की दर  देना होगा । हालांकि,  बैंकों ने 2900 से 3000 रुपये की दर मानकर ऋण दिया है और अब मौजूदा दर पर चीनी देने की बैंकों की मानसिकता नहीं है। बैंकों के विरोध के कारण, वर्तमान में राज्य में कोई भी चीनी मिल चीनी निर्यात करने के लिए तैयार नहीं है। चीनी उद्योग ने बैंकों को सुझाव दिया है कि,  उन्हें 2000 रुपये प्रति क्विंटल द्वारा चीनी निर्यात के लिए दे दी जाये और  केंद्र सरकार से मिलने वाली 1000 से 1100 रुपये सब्सिडी सीधा बैंकही ले ले ।
समस्या का समाधान निकालने की कोशिश लगातार जारी…
 
इस बीच, इस समस्या का समाधान निकालने के लिए महाराष्ट्र राज्य सहकारी साखर कारखाना एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जयप्रकाश दांडेगावकर, श्रीराम शेटे, एम.डी.  संजय खताल, ‘विस्मा’ के अध्यक्ष बी.बी.ठोम्ब्रे,  एम.डी. अजीत चौगुले,   दिलीप वलसे – पाटिल और  एम.डी.  प्रकाश नाईकनवरे  द्वारा लगातार समीक्षा की जा रही है। इस समस्या का हल निकलने के लिए पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार हस्तक्षेप कर सकते है  ।
चीनी मिलें और बैंकों को एक संयुक्त खाता खोलने का प्रस्ताव…
चीनी उद्योग केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली,  केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ बात करने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि वित्त मंत्री आरबीआई को आदेश देते हैं, तो  आरबीआई अधिसूचना के बाद बैंक निर्यात के लिए चीनी को अपने कब्जे से छोड़ सकते है । चीनी मिलें और बैंकों को एक संयुक्त खाता खोलना चाहिए और केंद्र सरकार की सब्सिडी को सीधे इस खाते में अनुरोध करना चाहिए। बैंकों को इस वित्त पोषण के साथ अपर्याप्त भेद भरना चाहिए। फिर शेष राशि चीनी मिलों को दी जानी चाहिए। राज्य में सभी चीनी मिलें  यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं।
SOURCEChiniMandi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here