चीनी मिलों की खाली पडी ज़मीन का अन्य उपयोग कर आमदनी बढाने पर दिया जाएगा जोर

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रोहतक, 30 सितम्बर: हरियाणा में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। राजनीतिक दल टिकट वितरण के लिये प्रत्याशियों के चयन में व्यस्त है। सरकारी मशीनरी चुनावी तैयारियों में मशगूल है। चुनावों की उठापटक के बीच हमारी टीम ने जायज़ा लिया गन्ना किसानों और चीनी मिलों का। सबसे पहले हमारी टीम पहुँची रोहतक में। यहाँ हमारी टीम ने रोहतक के बहाली आनन्दपुर निवासी गन्ना किसान जगपाल से बात की और खेत का जायज़ा लिया। जगपाल ने कहा कि सरकार ने बीते दिनों गन्ना पैराई समय पर होने के निर्देश दिये थे। इसलिए हम लोग भी समय पर गन्ना कटाई कर चीनी मिल में गन्ना ले जाएँगे ताकि समय पर पैसा मिल सके और घर परिवार का ख़र्च चलाने मे दिक्कत ना आए।

रोहतक के अनवल गाँव निवासी गन्ना किसान देवाराम ने कहा कि सरकार ने इस बार नवम्बर में गन्ना पेराई सत्र शुरु किए जाने का दावा किया था जिसको लेकर हम भी उत्साहित है। समय पर गन्ना मिलों में चला जाएगा तो हमें बहुत सारी चिन्ताओं से मुक्ति मिल जाएगी।

प्रदेश में चीनी मिलों के लिए गाइडलाइन जारी करने के मसले पर बात करते हुए हरियाणा शुगरफेड के चेयरमैन सरदार हरपाल सिंह ने कहा कि सरकार ने बीते महिने चीनी मिल मालिकों, प्रबंध निदेशकों और अन्य सक्षम अधिकारियों के साथ बैठकर कर ये तय किया था कि प्रदेश की सभी चीनी मिलें मध्य नवम्बर तक गन्ना पैराई शुरु कर लेंगी। इसके लिये चालू सत्र 2019-20 के लिेए चीनी मिलों की गन्ना पैराई उपयोगिता 90 से अधिक करने के साथ गन्ने की रिकवरी भी 10.5 फ़ीसदी तक ले जाने पर जोर दिया गया था। हरपाल सिंह ने कहा कि सूबे की सहकारी चीनी मिलों का पैराई सत्र बढाने पर जोर दिया जा रहा है। हरपाल सिंह ने कहा कि इस बार रोहतक में 45 लाख मिट्रिक टन, करनाल में 35 लाख मिट्रिक टन, पानीपत में 28 लाख मिट्रिक टन, सोनीपत में 35 लाख मिट्रिक टन, शाहबाद चीनी मिल में क़रीब 60 लाख मिट्रिक टन गन्ने के पैराई के लिए आने की संभावना है।

हरपाल सिंह ने कहा कि शासन की ओर से चीनी मिलों को वित्तीय घाटे को कम करने की तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया है ताकि गन्ना किसानों और चीनी मिलों दोनों को फ़ायदा हो। चीनी मिलों को कई सुझाव दिए है इनमें अपने यहाँ शीरा से एथनॉल बनाने और गन्ने से निकलने वाली खोई की भी बिक्री कर आमदनी लेने जैसे विकल्प अपनाने की सलाह दी गयी है। शासन ने चीनी मिलों के वित्तीय समायोजन के लिए गन्ने से एथनॉल बनाने के विकल्प अपनाने के भी निर्देश दिए है।

शासन की इस पहल से प्रेरित हरियाणा शुगर मिल संघ से जुड़े रोशन लाल ने कहा चीनी मिलों को चलना आज घाटे का सौदा साबित हो रहा है। चीनी के पूरे दाम नहीं मिल रहे है, ऐसे में अगर हम गन्ने से चीनी बनाने पर ध्यान देंगे तो ज्यादा फ़ायदा नहीं होगा। रोशन लाल ने कहा चीनी के बजाय एथनॉल के दाम अधिक मिलते है इसलिये हम लोग चीनी के बजाय एथनॉल निर्माण पर ज्यादा जोर दे रहे है।

चीनी मिलों की आमदनी के श्रोत बढाने के मसले पर बात करते हुए हरियाणा शुगरफेड के प्रबंध निदेशक पंकज अग्रवाल ने कहा कि चुनावों का समय है इसलिये अन्य ज़िम्मेदारियाँ भी हम पर आन पड़ी है। लेकिन हमने प्रदेश में मिलों को समय पर गन्ना पैराई सत्र चालू करने के निर्देंश दिए है। ये निर्देश सभी जिलों की मिलों पर लागू है। अग्रवाल ने कहा कि कई सहकारी चीनी मिलों की तो अभी से पैराई सीजन के लिए तैयारियां पूरी हो गयी है। अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश की सभी सहकारी चीनी का सर्वे करवाया जा रहा है। मिलों में खाली पडी ज़मीन का अन्य उपयोग कर उससे आमदनी बढाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में रोहतक चीनी मिल में रिफाइंड शुगर की पहली मिल लगायी गयी है ताकि इसे बेहतर तरीक़े से ब्रांडिंग कर के बेचा जा सके और चीनी मिलों को अतिरिक्त आमदनी हो सके।

ग़ौरतलब है कि हरियाणा में प्रशासन अभी चुनावों मे व्यस्त है लेकिन बावजूद इसके सूबे किसानों को गन्ना पैराई सत्र के दौरान कोई परेशानी न हो इसके लिये एक ओर जहाँ समुचित प्रबंध किए गए है वहीं दूसरी ओर चीनी मिलों से गन्ना किसानों का उनका बकाया समय पर मिले इसके निर्देश भी दिए गए है।

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