कर्नाटक में बाढ़ से चीनी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना

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बेलागवी: महाराष्ट्र के पुणे, सांगली, सतारा और कोल्हापुर जिलों में पहले से ही भारी बारिश ने कहर बरपाया और आम जनजीवन ठहर सी गई थी, और अब कर्नाटक इसका सामना कर रहा है। बाढ़ ने प्रभावित जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचाया है। अन्य फसलों की तरह, अत्यधिक जलभराव से गन्ने को भी नुकसान पहुंचा है।

बेलगावी जिले में गन्ना किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, जिले में 40 लाख टन गन्ने का नुकसान हुआ है। ऐसी उम्मीद की जा रही है की गन्ने पर प्रभाव के चलते कर्नाटक में चीनी उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है। राज्य में सीजन 2019-2020 के लिए चीनी का उत्पादन लगभग 32 लाख टन होने की उम्मीद थी, लेकिन बाढ़ के बाद इसमें गिरावट आ सकती है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही स्तिथि है, जहाँ यह चीनी उत्पादन लगभग 70 से 75 लाख टन माना जा रहा था, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना ​​है कि बाढ़ के बाद चीनी का उत्पादन 12 से 15 प्रतिशत तक गिर सकता है।

एक बार, पानी का स्तर कम हो जाता है, तो कर्नाटक और महाराष्ट्र में नुक्सान कितना है इसको लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ जायेगी। और इसका चीनी उत्पादन पर कितना असर होगा यह भी साफ़ हो जाएगा। यह भी संभावना है कि उत्पादन में गिरावट के कारण बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं।

गन्ना किसान जो पहले से ही गन्ना बकाया को लेकर आक्रोश में है अब वे सदमे की स्थिति में हैं और अब अपने जीवन को वापस से पटरी पे लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बाढ़ ने न केवल जीवन को छीना है, बल्कि इसने हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति, फसलों और अन्य को भी नुकसान पहुंचाया। उद्योग निकायों और राजनीतिक दलों ने भी स्थिति का आकलन किया है और दावा किया कि सिर्फ महाराष्ट्र में बाढ़ से उद्योगों के बंद होने और फसलों के गंभीर नुकसान से कम से कम 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

अब तक, 1,058 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और राज्य और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पूरे भारत में 18 लाख से अधिक लोगों को बचाया गया है। 152 जिलों में, बाढ़ प्रभावित लोगों को आश्रय देने के लिए 7,800 से अधिक राहत शिविर खोले गए हैं।

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