ऑटोमेकर्स के लिए 6 महीने में बायोफ्यूल वाहनों की पेशकश करना अनिवार्य होगा: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, भारत ऑटो निर्माताओं के लिए अगले छह महीनों में 100 प्रतिशत जैव-ईंधन पर चलने वाले वाहनों की पेशकश करना अनिवार्य कर देगा। इस तरह का कदम उन उपभोक्ताओं के लिए प्रभावी होगा, जो पेट्रोल की ऊंची कीमतों से परेशान हैं। मंत्री गडकरी ने कहा कि, एक लीटर बायो एथेनॉल की कीमत 65 रुपये है, जबकि पेट्रोल के लिए 110 रुपये का भुगतान किया जाता है। वैकल्पिक ईंधन कम प्रदूषणकारी है और विदेशी मुद्रा भी बचाता है।

आपको बता दे, देश में एथेनॉल उत्पादन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून, 2021 को साल 2025 तक भारत में एथेनॉल सम्मिश्रण के लिए रोडमैप पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग पहुंच के भीतर है। 2025 तक 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण से देश को अत्यधिक लाभ मिल सकता है, जैसे प्रति वर्ष 30,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत, ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन, बेहतर वायु गुणवत्ता, आत्मनिर्भरता, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न का उपयोग के साथ साथ किसानों की आय, रोजगार और निवेश के अधिक अवसर निर्माण होंगें।

गडकरी ने ब्रोकरेज एलारा कैपिटल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, हम फ्लेक्स इंजन मानदंडों के साथ वाहन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, छह महीने के भीतर, हम फ्लेक्स इंजन (अनिवार्य) बनाने के लिए ऑर्डर देंगे। उन्होंने कहा कि, राज्य द्वारा संचालित तेल विपणन कंपनियों को पहले ही पेट्रोल और डीजल के साथ साथ अब जैव-ईंधन की सुविधा देने का आदेश दिया जा चुका है। मंत्री गडकरी ने कहा कि, उपभोक्ताओं के पास पेट्रोल और बायो एथेनॉल के बीच एक विकल्प होगा और विकल्प पर स्विच करना भी देश के लिए आवश्यक है क्योंकि चावल, मक्का, और चीनी जैसी फसलों के अधिशेष उत्पादन से बायो एथेनॉल बनाया जाता है।

गडकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण भी विभिन्न श्रेणियों में तेज गति से चल रहा है और अनुमान है कि एक साल में सड़कों पर ऐसे वाहनों की बाढ़ आ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में, वह चाहते हैं कि भारत दुनिया में अग्रणी ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाए, जो दुनिया के लिए सभी ईंधन वाले वाहनों की पेशकश कर रहा हो। उन्होंने कहा कि हाल ही में शुरू की गई वाहन कबाड़ नीति से कच्चे माल की सोर्सिंग में मदद मिलेगी।

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