उत्तर प्रदेश की तरह उत्तराखंड में भी सरकार ने नहीं बढ़ाया गन्ना मूल्य; गन्ना किसान आक्रोश में

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देहरादून: उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड की राज्य सरकार ने भी इस साल गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (गन्ना मूल्य) नहीं बढ़ाया है तथा इसे पिछले साल के समान ही रखा गया है। इससे लंबे समय से अपनी उपज का अच्छा मूल्य मिलने का इंतजार कर रहे राज्य के गन्ना किसानों को भारी निराशा हुई है।

उत्तराखंड सरकार ने गन्ने का समर्थन मूल्य घोषित करते हुए इसे पिछले साल के बराबर ही रखा है तथा इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की। इसके तहत गन्ने की अच्छी किस्म के लिए 327 रुपये और सामान्य किस्मों के लिए 317 रुपये प्रति क्वींटल का समर्थन मूल्य रखा गया है जो उत्तर प्रदेश के मुक़ाबले मात्र दो रुपये ज़्यादा है।

बता दें कि उत्तराखंड में गन्ने के समर्थन मूल्य की घोषणा में देर होने के कारण चीनी मिलों में बिना मूल्य की पर्ची पर किसानों से गन्ना लिया जा रहा था। ऐसे में गन्ना किसानों को उम्मीद थी कि इस बार सरकार समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी करेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। समर्थन मूल्य की दरें पिछले साल के समान ही रखी गई हैं तथा इससे संबंधित आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। गन्ने की विभिन्न किस्मों के लिए 327 रुपये और 317 रुपये प्रति क्वींटल का समर्थन मूल्य रखा गया है। यह गन्ना मूल्य राज्य की सहकारी, सरकारी व निजी क्षेत्र की समस्त चीनी मिलों द्वारा देय होगा और मौजूदा पेराई के सीज़न में इन्हीं दरों के अनुसार किसानों को चीनी मिलों से भुगतान किया जाएगा। इस साल भी गन्ना मूल्य नहीं बढ़ने से राज्य के गन्ना किसानों में भारी निराशा है।

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