उत्तर प्रदेश में गन्‍ना माफिया का भांडाफोड…

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मेरठ : चीनी मंडी

उत्तर प्रदेश में एक तरफ जहां गन्‍ना बकाया भुगतान की समस्या से किसानों का एक बडा तबका परेशान है, तो तभी दुसरी तरफ गन्‍ना माफिया मृत किसानों के नाम पर गन्‍ने की पर्चियों की हेराफेरी में लगे हैै। हाल ही में उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग के एक बडे रॅकेट का पर्दाफाश हुआ हैै। गन्ना माफिया, कुछ किसान व गन्‍ना विभागीय कार्यालय के कर्मचारी आपस में सांठगाठ बनाकर डबल बांड चलाते पाए गए हैं। यह बात सामने आने के बाद गन्‍ना विभाग हरकत में आ गया है।

मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने शिकायतों को देखते हुए रकबे और बांड की जांच कराई थी। इसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

चीनी मिलों को गन्ना आवंटित करने के लिए कराए गए सर्वे में मंडल के 7186 मृत किसानों के नाम पर गन्ना डाला जाना मिला और तो और 1200 से ज्यादा भूमिहीन लोग गन्ना किसान बने मिले। 1250 से जादा किसानों के डबल बांड चलते पाए गए। 1899 किसानों के पास बढ़ा रकबा मिला। गन्‍ना सर्वे में पाए गये इस धांधली के बाद उद्योग में हडकंप मच गया है। गन्ना एक्ट के मुताबिक प्रदेश के किसान शुगर मिलों को सीधे गन्ना ना देकर समिति के माध्यम से गन्ना आपूर्ति करते हैं। इसके लिए किसानों को फीस देकर गन्ना विकास समिति का सदस्य बनना पड़ता है। समिति अपने सदस्यों को गन्ना आपूर्ति करने के लिए बांड जारी करती है। इसके आधार पर किसान अपना गन्ना मिल को सप्लाई करते हैं। जांच में बडी गडबडीयां पायी गई है। मंडल में 1254 किसानों के डबल बांड मिले हैं। ये बांड फर्जीवाड़ा करके बनवाए गए थे। इससे किसान समय से पहले ही अपना गन्ना डालकर अलग हो जाता है। बची हुई पर्चियां गन्ना माफिया के काम आती हैं। अब इसपर प्रदेश की योगी सरकार क्या एक्शन लेगी, इसपर सभी की नजरें टिकी है।

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