महाराष्ट्र: चीनी मिल के लिए 25 किलोमीटर हवाई दूरी की शर्त रद्द करने पर मतभेद

कोल्हापुर: देश में सबसे ज्यादा यानी 210 चीनी मिलें महाराष्ट्र में हैं। राज्य में चीनी मिलों की स्थापना के लिए 25 किलोमीटर (KM) की हवाई दूरी की शर्त निर्धारित की गई है, ताकि प्रत्येक चीनी मिल को पर्याप्त गन्ना मिले और हर एक मिल पूरी क्षमता से चल सके। हालांकि, मंगलवार (16 जनवरी, 2024) को एक बार फिर किसान संगठनों ने चीनी मिलों के बीच 25 किलोमीटर की हवाई दूरी की शर्त को रद्द करने की मांग की। चूंकि 25 किमी की हवाई दूरी की शर्त को रद्द करने को लेकर मौजूदा चीनी मिल मालिकों और किसान संगठनों के बीच अत्यधिक मतभेद है, इसलिए राज्य सरकार को इस पर निर्णय लेने के लिए कड़ी मुशक्कत करनी होगी। चीनी आयुक्तालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 सीज़न के लिए महाराष्ट्र में कुल 197 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है। इसमें 97 सहकारी और 100 निजी चीनी मिलें शामिल हैं। पिछले सीजन में 204 चीनी मिलें शुरू थी।

किसान नेताओं का दावा, दूरी की शर्त से चीनी मिलों का एकाधिकार

सभी मिलों ने अपनी पेराई क्षमता और सिंचाई प्रणाली में वृद्धि की है। इसलिए उनके सामने गन्ने की उपलब्धता का प्रश्न नहीं होगा। किसान नेताओ का दावा है की, 25 किमी हवाई दूरी के नियम ने कुछ राजनीतिक नेताओं के लिए चीनी उद्योग में एकाधिकार बना दिया है। किसानों को गन्ने की अच्छी कीमत दिलाने के लिए चीनी उद्योग में खुली प्रतिस्पर्धा पैदा करने की जरूरत है। इसलिए किसान नेताओं ने पुरजोर मांग की कि हवाई दूरी की शर्त को रद्द किया जाए। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता, पूर्व सांसद राजू शेट्टी, रयत शेतकरी संगठन के अध्यक्ष, पूर्व मंत्री सदाभाऊ खोत, रघुनाथ दादा पाटिल आदि नेताओं ने लगातार 25 किमी की हवाई दूरी की शर्त को रद्द करने की मांग की है।

गन्ने के लिए प्रतिस्पर्धा होगी, तभी किसानों को फायदा होगा…

किसान नेताओं के अनुसार, किसान सहकारी समितियों और किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीओ) को चीनी मिलें स्थापित करने के लिए हवाई दूरी की शर्त को समाप्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए। किसान संगठनों की ओर से लगातार चीनी मिलर्स के आसपास सत्ता के केन्द्रीकरण आलोचना की जाती है। मिलर्स के एकाधिकार को तोड़ने के लिए हवाई दूरी की शर्त खत्म करने से फैक्ट्रियों में गन्ना लेने की होड़ मच जाएगी और किसानों को इससे बेहतर कीमत मिलेगी, ऐसा किसान नेता तर्क दे रहे है।

मिलर्स को गन्ने की कमी के कारण मिलें बंद होने की आशंका…

चीनी मिल मालिकों के मुताबिक, हवाई दूरी की शर्त रद्द होने पर कोई भी फैक्ट्री पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाएगी। इससे फैक्ट्रियों को घाटा होगा, कई फैक्ट्रियां बंद हो सकती है। इससे मिलर्स के साथ-साथ किसानों को भी नुकसान हो सकता है। चीनी मिलर्स के मुताबिक पेराई का सीजन पहले ही 180 दिन से घटकर 100 से 120 दिन रह गया है। मिलों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए गन्ना पाने की होड़ पहले से ही चल रही है। फिर, यदि हवाई दूरी की शर्त रद्द कर दी गई और नई फ़ैक्टरियाँ स्थापित की गईं, तो कोई भी फ़ैक्टरी पूरी क्षमता से नहीं चल पाएगी। मिलों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर किसानों पर भी पड़ सकता है।

देश के इस साल के अब तक के पेराई सीजन पर एक नज़र…

नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड (NFCSF) के आंकड़ों के मुताबिक, देश की 509 चीनी मिलों में 15 जनवरी 2024 तक 1563.00 लाख टन गन्ने की पेराई की गई है और 148.70 लाख टन चीनी का उत्पादन किया गया है। पिछले 2022-23 सीजन में अब तक 519 चीनी मिलों ने 1681.49 लाख टन गन्ना पेराई की थी और 160.00 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था। देश में औसत चीनी रिकवरी 9.51 फीसदी है, जो पिछले सीजन में 9.52 फीसदी थी। चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र अग्रणी है। महाराष्ट्र में अब तक 51 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश में 46.10 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here