संजीवनी मिल तुरंत शुरू करने की जरूरत: गन्ना किसान सुविधा समिति का सुझाव

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पोंडा: पूर्व सांसद नरेंद्र सवाईकर की अध्यक्षता में गन्ना किसान सुविधा समिति ने सोमवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को सौंप दी। रिपोर्ट में धर्मबंधोरा स्थित संजीवनी चीनी मिल में पेराई शुरू करने का सुझाव दिया गया है। गन्ना किसान सुविधा समिति ने डेक्कन शुगर टेक्नोलॉजी एसोसिएशन (पुणे) की सेवाओं को किराए पर लेने का भी सुझाव दिया है। समिति के सदस्य रमेश तावडकर, सुभाष फलदेसाई, एतिन मस्करनहास, हर्षद प्रभुदेसाई और सतीश तेंदुलकर भी उपस्थित थे। सवाईकर ने कहा कि, उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है कि वे मिल में इथेनॉल के उत्पादन की संभावनाओं पर विचार करें, ताकि मिल साल में कम से कम 300 दिनों तक चल सके। हाल के दिनों में कुछ पेराई सत्रों के दौरान, मिल कुल 100 दिनों तक भी नहीं चल सकी थी।

सवाईकर ने बताया की, राज्य सरकार ने माना है कि इथेनॉल का उत्पादन करने के लिए आवश्यक मात्रा में गन्ने का उत्पादन नहीं किया जाता है, हमने सुझाव दिया है कि मोलासेस या गन्ने के सिरप का आयात किया जाए। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया है कि, कृषि विभाग को चीनी मिल के कृषि शाखा को मजबूत करने का काम सौंपा जाए। संजीवनी चीनी मिल को गन्ने की उच्च उपज वाली किस्मों का बीज प्लॉट तुरंत विकसित किया जाना चाहिए, ताकि अगले साल अक्टूबर या नवंबर तक बीज गन्ना किसानों को उपलब्ध कराया जा सके। चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने आश्वासन दिया कि, गन्ना फसल की लागत के लिए प्रति टन 600 रुपये की राशि शीघ्र ही किसानों को वितरित की जाएगी।

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