Bagasse से बिजली उत्पादन को बढ़ावा, चीनी मिलों को प्रति यूनिट 1.5 रुपये की सब्सिडी मिलेगी: राज्य सरकार का फैसला

मुंबई: राज्य सरकार ने 7 मार्च 2024 को चीनी मिलों को बगास (Bagasse) पर आधारित बिजली उत्पादन के लिए 1.50 रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी देने का फैसला किया है। इस फैसले से आर्थिक तंगी से परेशान चीनी मिलों को काफी आर्थिक राहत मिलेगी और सरकार का अनुमान है कि अगले साल के अंत तक 1 हजार 350 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।

‘चीनीमंडी’ से बात करते हुए वरिष्ठ चीनी उद्योग विशेषज्ञ पी. जी. मेढ़े ने कहा, महाराष्ट्र में कई मिलों ने बगास पर आधारित को-जेन परियोजनाएं स्थापित की हैं। कुछ फैक्ट्रियां ऐसी परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया में है। महाराष्ट्र बिजली आयोग ने प्रति यूनिट बिजली की दर 4.50 से 4.65 तय की है। उत्पादन लागत को ध्यान में रखते हुए, यह दर चीनी मिलों के लिए वित्तीय रूप से किफायती नहीं है। इस रेट को बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र राज्य साखर संघ के माध्यम से लगातार सरकार से गुहार लगाई गई। दो साल पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति ने भी प्रति यूनिट एक रुपये की सब्सिडी की सिफारिश की थी, लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया।वाज़िब दाम न मिलने से परियोजनाएं घाटे में चल रही हैं।

वर्तमान समय में राज्य में उद्योगों का बड़े पैमाने पर विकास होने लगा है, और इसलिए बिजली की मांग भी लगातार बढ़ती जा रही है। कोयले से चलने वाले बिजली प्लांट्स वायु प्रदूषण की समस्या पैदा करते हैं। इसके अलावा, कोयले की कमी, निम्न गुणवत्ता वाला कोयला, परियोजना से बिजली की आपूर्ति करते समय पारगमन हानि (ट्रांजिट लॉस) आदि जैसे विभिन्न कारणों से, राज्य में बिजली उत्पादन पर सीमाएं है। दूसरी तरफ राज्य में गन्ने का उत्पादन बढ़ रहा है और चीनी मिलों से प्रचुर मात्रा में खोई उपलब्ध हो रही है। साथ ही खोई आधारित को- जनरेशन प्लांट्स से वायु प्रदूषण भी कम होता है। बिजली उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आय से किसानों को गन्ना बिल का भुगतान समय पर करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने गैर-पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र से 2025 तक 1,350 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। यह बिजली उत्पादन चीनी मिलों द्वारा बगास के माध्यम से किया जा सकता है। हालाँकि, बिजली कंपनियों की बिजली खरीद दर 4 रुपये 75 पैसे से 4 रुपये 99 पैसे प्रति यूनिट थी। अब नए फैसले के मुताबिक यह सब्सिडी सिर्फ 6 रुपये प्रति यूनिट तक ही दी जाएगी।मिलों द्वारा जिस दर पर बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, उसके आधार पर सब्सिडी 6 रुपये की सीमा तक दी जाएगी।इस फैसले से चीनी उद्योग को बड़ी राहत मिल गई है।

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