चीनी उद्योग का निर्यात टार्गेट असम्भव : इस्मा

चीनी मंडी : जुलाई महिने में चीनी की निर्यात मे २० प्रतिशत से जादा गिरावट के कारण चीनी उद्योग अपने निर्यात टार्गेट तक पहुचने में असफल रहा और ३० सितम्बर तक २० लाख टन चीनी निर्यात असंभव होने की आशंका इंडियन शुगर मिल्स असोसिएशन (इस्मा) ने जताई है.

चीनी का घरेलू बाज़ार और निर्यात दर में जो भारी अंतर है, उसकी वजह से ही निर्यात में गिरावट आ चुकी है. अब चीनी की निर्यात में पर किलोग्राम के पिछे १० से ११ रुपयों का नुकसान हो रहा है, इसकी वजह से ही चीनी की निर्यात में गिरावट देखी जा रही है. बहुत सारी चीनी मिलों ने चीनी की एक्सपोर्ट रोक दी है.
भारत सरकार की पॉलिसी चीनी को एक्सपोर्ट के लिए फायदेमंद नहीं साबित हो रही और घरेलू बाज़ार में बढे हुए चीनी के दाम आर्टिफिशियल होने का दावा ‘इस्मा’ की तरफ से किया गया है. आगे फेस्टिवल सीज़न के चलते चीनी की २१.५-२२ लाख टन डिमांड रहने की सम्भावना है. सरकारने अगस्त के लिए १७.५ लाख टन का कोटा फिक्स किया है. जून महीने में यही कोटा १६.५ लाख टन का था.

अभी देश में केवल २० – ३० प्रतिशत चीनी मिले ही अपना एक्सपोर्ट टार्गेट पूरा कर पा रही है. यह देखते सरकार को चीनी मिलों को आश्वस्त करना चाहिये ताकि वो भी अपना निर्यात कोटा पूरा कर सकें. चीनी उद्योग सरकार से चीनी की कीमते कमसे कम ३५-३६ रूपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे है. अगर सरकार चीनी की कीमत तय करती है तो सरकार को चीनी निर्यात के लिए कोई भी मदत करने की जरुरत नहीं पड़ेगी,चीनी मिले खुद ही घरेलू बाज़ार से अच्छी कमाई करके एक्सपोर्ट घटा खुद उठा सकती है, ऐसा इस्मा का दावा है.

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