कर्नाटक: चुनाव से पहले उठा गन्ना मुद्दा

धारवाड़: कर्नाटक गन्ना उत्पादक संघ ने किसानों की समस्याओं के प्रति ‘राजनीतिक दलों’ की उदासीनता के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सभी गांवों में ‘रैथारा नादिग, जागृति कादगे’ (किसान जागरूकता मार्च) का आयोजन करने का फैसला किया है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर मुताबिक, संघ के अध्यक्ष कुरूबुर शांतकुमार ने कहा कि उन्होंने मांगों का एक चार्टर रखा है और उस पार्टी का समर्थन करने के लिए तैयार हैं जो उन्हें पूरा करने के लिए सहमत है और उन्हें अपने घोषणापत्र में शामिल करती है।

उन्होंने कहा, चूंकि कोई भी राजनीतिक दल हमारी मांगों को पूरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए आगे नहीं आया, इसलिए किसानों से विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से सवाल करने के लिए कहा जाएगा। सभी गांवों में जो जत्था निकाला जाएगा वह 30 अप्रैल तक जारी रहेगा।शांतकुमार ने कहा कि, अपराधी, भूमाफिया, चीनी कारोबारी और शिक्षण संस्थान चलाने वाले भारी धन खर्च कर चुनाव लड़ते हैं और फिर लोगों का शोषण करते हैं।

उन्होंने कहा कि, किसानों में उम्मीदवारों को हराने और सरकारों को गिराने की क्षमता है और राजनीतिक नेताओं को यह समझना चाहिए।

डॉ स्वामीनाथन की सिफारिशों के आधार पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाना, किसानों के लिए आय गारंटी योजना, किसानों को दिन में 12 घंटे बिजली की निर्बाध आपूर्ति, किसानों के ऋणों की पूर्ण माफी, CIBIL स्कोर पर विचार किए बिना सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा किसानों को ब्याज मुक्त ऋण, सभी फसलों के लिए फसल बीमा योजना का विस्तार, गन्ने की खड़ी फसल के लिए उचित पारिश्रमिक मूल्य तय करना और किसानों को एथेनॉल का उत्पादन करने और ट्रैक्टरों के लिए ईंधन के रूप में उपयोग करने की अनुमति आदि प्रमुख मांगें हैं।

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